एक सियार की खाल से जब रंग उतरता है तो वह कितना डरावना लगता है।

केजरीवाल के फ्री बिजली पर हुहदंग मचाने वाले जागरूक नागरिको में से क्या कोई जानता है कि हसन निसार कौन है? अगर नही तो अपने बचपने को छोड़िये और घर की लड़ाई से बाहर निकलिए। देखिए दुनिया मे क्या हो रहा है? कब तक कुछ बर्तन और आंगन के बंटवारे के लिए अपनो से लड़ते रहोगे?मेरे पास हसन निसार की सख्सियत को समझाने के लिए भारत मे कोई सही उदाहरण नही है जिसे मैं दावे से कह सकू की आप जानते ही होंगे मगर फिर भी आप उसे पाकिस्तान की अरुंधति राय समझ सकते हैं। जिसके बोल अक्सर पाकिस्तान के खिलाफ ही रहें हैं, फिर सरकार किसी की भी रही हो। पहली बार हसन ने नवाज शरीफ समेत पुराने हुक्मरानों से तंग आकर उस पाकिस्तानी जनता से इमरान के लिए वोट की गुहार लगाई जिसे अक्सर वह जाहिलो का हुजूम, नीच, बेग़ैरत तो कहता ही था साथ मे अपना महसूर वक्तव्य जोड़ना नही छोड़ता था कि ” मैं तो हमेशा सच ही बोलूगा, पाकिस्तानी कौम को बुरा लगे भी तो मेरा क्या उखाड़ लेंगे… कौन सा मुझे चुनाव लड़ना है।” अल्ला ने हसन की सुनी और 2018 में फौज के घोड़े में चढ़कर इमरान प्रधानमंत्री बन गया। बात यही तक नही ठहरी, पाकिस्तान का अरुंधति राय और कभी एक सुई भी न बना पाने वाली मुस्लिम उम्मा को हर वक्त जलील करने वाला विज्ञान का पैरोकार अब इमरान का ऐसा प्रवक्ता बन गया जैसे भारत के महाज्ञानी शशि थरूर राहुल गांधी के प्रवक्ता बने बैठे हैं। अब मुझे समझ नही आ रहा है कि हसन का डीएनए ऐसा था जो अब अपने असली रंग में आ गया है या सारे इंसान का डीएनए ही ऐसा होता है। आज के दिन इमरान को डिफेंड करते करते हसन निसार अपनी हैसियत से इतना नीचे गिर गया है कि इस गिरावट ने मेरे अनुभव को एक पायदान ऊपर उठा दिया। मुझे समझ आया कि इंसान की विचार दरअसल भावनाओ का बुलबुला है जो उसकी नफरत और लगाव पर पूर्णतः निर्भर होती है…सियासत अगर फायदे की हो तो क्या राहुल, क्या मोदी? क्या समरसता, क्या कट्टरता?अभी महज दो साल पहले तक पाकिस्तानी अवाम और सियासतदानों को कश्मीर की पैरवी पर गरियाने वाले हसन निसार, इमरान की टोपी बचाने के चक्कर मे आजकल भारत को धमकियां देने में उतारू हैं। आज एकबार फिर मैं हैरान हो गया जब हसन निसार को पाकिस्तानी चैनल पर ये कहते हुए सुना कि ‘भारत के हिंदुओं क्यों कश्मीर के लिए अपनी कब्र खोदने में तुले हो? पाकिस्तान अगर तबाह हो भी जाएगा फिर भी दुनिया मे 56 मुस्लिम मुल्क बचे रहेंगे मग़र हिन्दू तो दुनिया के नक़्शे से मिट जायेगा।’ हालांकि उसने ये बात आज दोबारा दोहराई है मगर मेरी हैरानी का दौर पिछली बार वाले जैसा ही था, सोच रहा था कि एक सियार की खाल से जब रंग उतरता है तो वह कितना डरावना लगता है। वैसे फ्री बिजली देने वाले मुख्यमंत्री को ही पढ़ा लिखा मानने वाले लोग जो हसन को नही जानते वो इतना ही समझे कि अपनी पसंद की सरकार न होने पर अपने जमीर को हिमालय की चोटी में सजाकर सरकार की आलोचना करने वाला पहले का हसन निसार भाजपा सरकार के दौर का रवीश कुमार है और आज का हसन निसार कांग्रेस सरकार के जमाने का रविश कुमार। कुछ समझे?नही? चलिये छोड़िये…मत समझिये, शब्दो मे घुमाव जरा ऊँचे दर्जे का है, आपको समझ नही आया तो बुरा मत मानिए।हसन साहब आजकल ट्विटर पर नही है… मैंने उनसे मेल पर सम्पर्क साधा और उन्हें उनके भूतकाल की याद दिलाते हुए लिखा कि साहब… आजकल बौरा गए हो या सारी सहाफ़ियत कही दफना दिए हो? 80 लाख की आबादी वाले एक छोटा का डेढ़ इस्राइल पूरी मुस्लिम उम्मा के नाक में दम करके रख हुआ है। 6 मुस्लिम देश एक साथ आक्रमण करने के वावजूद उसने लड़ाई को न सिर्फ 6 दिन में जीता बल्कि उनकी जमीन भी हथिया ली और तथाकथित मुस्लिम उम्मा उसका कुछ नही उखाड़ पाई। अब जरा सोचिये…भारत लगभग 32 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला 100 करोड़ नही बल्कि 135 करोड़ लोगों का देश है याद है न? और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि भारत सिर्फ हिन्दुओ का नही है, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भी भारत मे ही बसती है और ये राष्ट्र उनका भी है। अब सोचिये कि भारत को मिटाने का ख्वाब देखने वाले का क्या हस्र होगा?

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Author: admin

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