औद्योगिक घरानों के दरवाजों पर क्यों खड़ी रहती हैं देश की सरकारें?

दुनिया भर में पूंजीवाद को अपना धर्म मानने वाले देशो से लेकर समाजवाद और साम्यवाद की बुनियाद खड़े देश तक उद्योग को अपने अपने शीर्ष पर रख चुके हैं. अगर भारत की बात करें तो 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्तमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के द्वारा लायी गयी उदार आद्योगिक नीति के बाद भारतीय उद्योग, आज के समय रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में कृषि के बाद दूसरे नंबर पर आता है जबकि देश की सरकारी तिजोरियां भरने में इसका योगदान प्रथम स्थान पर है. फिर औधोगिक घरानों को गाली देने वाले ये कौन लोग हैं? दुनिया की कोई एक सरकार बताओ जो अपने देश के उद्योग और उसे चलने वालों को सुविधाए नही उपलब्ध कराते?

बात यही तक सीमित नही है. उपनिवेशवाद का दौर याद करिए, इंग्लैंड, फ्रांस जैसे देशो ने लगभग आधी दुनिया में अपने उपनिवेश बना रखे थे भारत भी इन्ही उपनिवेश का एक हिस्सा था जिस पर अंग्रेजो ने लगभग 200 साल हुकूमत की. मगर अब जो दौर चल रहा है ये उपनिवेशवाद का नही, बल्कि ‘निवेश-वाद’ का दौर है. जहाँ एक तरफ गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी कंपनियों के जरिये अमेरिका दुनिया पर राज कर रहा है वही, Huawei, और अलीबाबा जैसे कंपनियों के जरिये चीन, अमेरिका को टक्कर देने की कोशिश में लगा हुआ है. कहने को ये सिर्फ कंपनी हैं मगर एक बार सोच कर देखिये कि इन कंपनियों के पास पूरे भारत के लोगों की जन्म कुण्डलिया हैं और ये अगर चाहे तो भारत के साथ कुछ भी कर सकती है? मसलन ये किसी भी देश की सरकारों को घुटने में ला सकती है. गूगल माप का एक्सेस बंद करके गूगल कई देशों का न सिर्फ ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ठप्प कर सकती है बल्कि कई उद्योग और यहाँ तक रक्षा उपकरणों को तबाह कर सकती है. और यही कारण है कि दुनिया का हर देश इन सब मसलो पर आत्मनिर्भर बनना चाहता है.

सरकारों का काम व्यवसाय करना नही होता और इसीलिए प्रतिस्पर्धा की इस दुनिया में कोई भी सरकार कुछ बेहद संवेदनशील सेक्टर को छोडकर, खुद उद्योग नही लगाती, क्योंकि ऐसा करके वह दुनिया का मुकाबला नही कर सकती. और यही कारण है कि दुनिया से मुकाबला करने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्रो के ऐसे उद्योगपतियों को सौंपी जाती है जो वास्तव में सक्षम हैं.

बहुत पीछे मत जाइये, 2015 में 1GB डाटा की क्या कीमत थी? और साथ ही ये भी जान लीजिये कि यह वह दौर था जब टाटा और एयरटेल जैसे नामों को छोड़कर भारत में ज्यादातर टेलिकॉम कंपनियां विदेशी थी. क्या उस समय आप youtube पर बिना Wi-Fi के किसी विडियो को देखने की हिम्मत जुटा पाते थे? बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या किसी दोस्त साथी के ऑफिस या घर के आसपास Wi-Fi के लालच घंटो बैठे रहा करते थे, ये दौर वह भी था जब गूगल ने हाल ही में देश के रेलवे स्टेशन पर Wi-Fi उपलब्ध कराने का वादा किया था और हम सब ने उस वक्त गूगल का सजदा किया था. तभी एक कंपनी आई और उसने पोर्न से लेकर स्टडी तक, विडियो सॉंग से लेकर HD मूवी तक, किसी भी विडियो को आपके मोबाइल तक पंहुचाकर, आपको बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर नल्ला बैठने की निर्लज्जता से निजात दिला दिया.

दुनिया में ये 5G का दौर चल रहा है और भारत 4G के लिए संघर्ष कर रहा है. दुनिया के कुछ देश मसलन साउथ कोरिया, पूरी तरह से 5G नेटवर्क में शिफ्ट हो चुके हैं तो कुछ देश इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं जबकि इसी बीच भारत, नोकिया, एरिक्सन जैसी कुछ हद तक सुरक्षित मगर मंहगी यूरोपियन कंपनी तथा  Huawei जैसी डाटा चोर मगर सस्ती चीनी कंपनी को लेकर कन्फ्यूज्ड था कि, अपने देश की लगाम किस कंपनी को सौपें? कौन सी कंपनी देश की अर्थव्यस्था पर फिट बैठेगी और कौन सी देश के संवेदनशील डेटा को कम चुरायेगी? कौन सी कंपनी देश के डेटा को देश में रखेगी या देश के बाहर लेकर जाएगी.

5G की दौड़ में इस बार JIO भी न सिर्फ सामिल हुआ बल्कि देखते ही देखते एक बड़ा प्लेयर बन गया. भारत के बाज़ार पर वर्षो से नज़र गडाए बैठी दुनिया भर की सरकारें और कंपनियों के लिए ये एक बड़ा धक्का था, जिसे वह चाह कर भी रोक नही पा रही है.

इस समय किसानो का मुद्दा गरम है और सरकार तथा किसानो के बीच की इस लड़ाई का फायदा देशविरोधी ताकतें उठानें में जुट गयी है, यद्यपि ये कोई नया ट्रेंड नही है, दुनिया की हर सरकार न सिर्फ अपने दुश्मन देश बल्कि मित्र देशो को अस्थिर करके खुद को मजबूत करने का अवसर खोजते रहते हैं और ऐसे कामों को लिए वह उस देश की जड़ों में लगे दीमकों पर बेतहासा दौलत लुटाते रहें है. और इसी कड़ी में एक बार फिर इन्ही दीमकों के द्वारा अडानी अम्बानी के भूत को आगे किया गया क्योंकि निशाने पर मुकेश अम्बानी नही बल्कि उनकी वो कंपनियां है जो दूसरी तमाम देशी विदेशी कंपनियों के व्यवसायिक हितो को नुक्सान पंहुचा रही है. विरोध करने वाला सामान्य नागरिक तो JIO का विरोध इसलिए कर रहा है कि मुकेश अम्बानी को तथाकथित हजारों एकड़ में गोदाम बनाने का अधिकार क्यों दिया गया मगर उसे पता नही है कि वह कर तो अपने मन की शांति के लिए रहा है मगर वास्तव में शांति किसी और के मन को मिल रही है जबकि वह विरोध करने वाला कल भी सडक पर था, आज भी है और कल भी रहेगा क्योंकि ढीठ सरकारें विरोध से नही वोट से गिराई जाती है.

  • राजेश आनंद

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Author: admin

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