देश की सुरक्षा और विकास के लिए टैक्स के पैसे को राजनीतिक फायदे के लिए मुफ्त में बाँटना मुश्किल नही है

विरोधी पार्टियां राजनीतिक लाभ के लिए आज के युवाओं में जिस तरह भारत विरोधी और लालच के बीज आरोपित कर रहे है इससे उन्हें चुनावी लाभ हो या न हो मगर भारत को तोड़ने का सपना देखने वाले पड़ोसी मुल्को को भविष्य में लाभ होने की पूरी उम्मीद है। कहते है राजनीतिक समझ को विकसित होते होते पूरी उम्र खप जाती है तब जाकर कोई सरदार पटेल बनता है तो कोई इंदिरा, शास्त्री या मोदी।

विकास, नौकरी, रोजगार, अर्थव्यवस्था ये सारे मुद्दे अस्थायी और परिवर्तनशील है जो सुरक्षित माहौल में आप कभी भी बेहतर कर सकते हैं मगर देश और उसके भौगोलिक भविष्य की सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है जहाँ आप एक बार खोये तो आज के अंतरराष्ट्रीय माहौल और परमाणु युद्ध के खतरों के बीच उसे भविष्य में भी आसानी से हासिल नही कर सकते।

भारत का विभाजन, विभाजित भारत में 1947 में गवाया गया POK औऱ 1962 में खोया हुआ अक्साई चीन इसका जीत जागता उदाहरण है।देश और वहाँ बसने वाली जनता का भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मज़बूत देश और उसके दूरदर्शी नेता कैसे काम करते है अगर ये समझना है तो आपको अपने पड़ोसी मुल्क चीन का उदाहरण लेना चाहिये।

1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान जब इंदिरा गांधी ने चीन को धमकी दी थी कि यदि वह पाकिस्तान की किसी भी तरह से कोई मदद करता है तो भारत उसके व्यापारिक जहाजो को हिन्द महासागर में घुसने नही देगा, जिससे घबराकर चीन पीछे हट गया मग़र साथ ही उसने हिन्द महासागर में भारत की मजबूती को तोड़ने के लिए रास्ते निकलने में जुट गया जिसका परिणाम ये हुआ कि चीन पिछले कुछ सालों में श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश , मालदीव, पाकिस्तान और अब ईरान जैसे देशों में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से अपने सैनिक अड्डे बनाकर भारत को चारों तरफ से घेरता रहा और हमारी सरकारें देश को युवाओ और जनता को लॉलीपॉप बाँटने में व्यस्त रही, क्योकि अगर ऐसा नही करती तो सस्ती या फ्री चीजो की भूखी जनता और सरकारी रोजगार को ही रोज़गार मानने वाले महान युवा देश मे आग लगा देते।

दिल्ली में सस्ती बिजली पर शिक्षित मुख्यमंत्री होने का ताना मारने वाले आज के तथकथित युवा और लालची लोग ये भूल जाते है कि देश की एकता, सुरक्षा और विकास के लिए टैक्स के इकट्ठे पैसे को राजनीतिक फायदे के लिए मुफ्त में बाँटना बहुत मुश्किल नही है अगर आपको देश के भविष्य की परवाह न हो मगर देश को एकीकृत करने के लिए 370 और 35 A को हटाने, नोटबन्दी और पाकिस्तान में घुस कर आतंकी ठिकाने को तबाह करने जैसे फैसले लेने के लिए हिम्मत चाहिए क्योंकि ये सचमुच आत्मघाती फैसले है जिन पर जरा सी चूक हुई तो राजनीतिज्ञ का न भूत बचेगा न भविष्य। नकारात्मक परिणाम आने पर देश के अंदर आपकी एक गलती के इंतज़ार में बैठे लोग आपका राजनीतिक भविष्य खा जायेगे और सफल हुए तो इस हिमाकत के लिए पूरी दुनिया के लोगो को जवाब देते देते आप थक जायेगे।

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Author: admin

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