बाबा रामदेव! हम, हिंदुस्तान यूनीलीवर के माल को खरीदने वाले लोग हैं

बाबा रामदेव! हम, हिंदुस्तान यूनीलीवर के माल को खरीदने वाले लोग हैं, तुम फक्कड़ इंडियन, बीच मे कैसे आ गए? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई कि तुम किसी विदेशी कंपनी को चुनौती दो। तुमने हिंदुस्तान यूनीलीवर के प्रोडक्ट को केमिकल्स की जगह हर्बल की ओर मुड़ने की लिए मजबूर कैसे किया? क्या तुम जानते नही कि हमारे लिए सही ग़लत का चुनाव करने का अधिकार पश्चिमी देशों को है और वास्तव में हमे वही बता सकते है कि हमारे लिए क्या सही है क्या गलत? और तुमने ये योग योग क्या लगा रखा है? हम इस बेकूफ़ी को तब तक नही मानेंगे जब तक कोई विदेशी कंपनी इस पर ठप्पा नही मार देती। और तुम ये मत सोचना की तुम यादव हो तो ओबीसी तुम्हारे साथ आ जायेंगे? ये गुनाह तो तुम्हारा सबसे बड़ा है। ओबीसी ओबीसी चिल्लाने वाले लोग एक दुकान तक नही खोल सके और तुमने लाखो करोड़ की कंपनी बना ली? ओबीसी तुम्हे कैसे बर्दास्त कर ले? भई वह तो चोर सिपाही खेल रहे थे, तुम तो सचमुच सिपाही बन गए? देखो अगर देश मे समान बेंचना है तो देश के मुद्दे पर बोलना छोड़ दो, और हमारी मानो तो गले से अपना स्वर यन्त्र ही निकलवा दो। क्योंकि यहाँ लोगो को विरोधी आवाज सुनने की आदत नही है, बात देशहित में हो तब भी नही, समझे तुम? अच्छा सुनो, यूँ मुँह मत लटकाओ, हमारा दिल जरा नाजुक है, तुम पर दया तो आ रही है, लेकिन इतना भी नही तुम्हे ऐसे ही छोड़ दे। अगर तुम चुप नही रह सकते तो एक काम करो, कोई ऐसी बात बोलो जो सबके कानो को प्रिय लगे, बोलो…बोल सकते हो? गंदगी से नहाए हुए व्यक्ति को स्वच्छ कह सकते हो? राम मंदिर के फ़ैसले का एक साथ स्वागत और बहिष्कार कर सकते हो? और सुनो बाबा राम देव, तुम्हे एक साथ आरक्षण का समर्थन और विरोध करना होगा, तुम्हे भारत के खिलाफ ऐसी चतुराई से बोलना होगा जो खिलाफ भी न लगे। अरे तुम ये सुन कर इतना हैरान क्यो हो रहे हो? ये हिंदुस्तान है, यहाँ लोग बोलते हैं… देश की छाती में बैठ कर! सेक्युलर का नाम सुने हो न? जी जी वही लोग। तुम्हे उन्ही की तरह सैनिकों का अपमान भी करना होगा तो सम्मान के साथ। देश को गरियाना भी होगा हाँथ में तिरंगा थाम कर। और बात यहीं नही थमेगी बाबा… एक काम और करो तुम, ससुरा जो सबसे जरूरी है। हम तो भूले ही जा रहे थे! अपनी धोती को गेरुआ रंग से रंगने से बात नही बनेगी, क्योकि हमारी भावनाये आहत होती है… सेक्युलर जो ठहरे। तुम्हे उसमे हरा और नीला रंग भी डालना पड़ेगा! समझ गए?अरे जा कहाँ रहे हो, अभी मेरी बात पूरी नही हुई। और हाँ जरा गहरी सांस लो, यूँ हमसे डरो मत, इंसान हैं हम, कोई जानवर नही, हम समझते हैं कि तुम बिज़नेस मैन हो, तुम्हे अभी सब्जी मशाला भी कूटना होगा। बस जाते जाते इतना सुनते जाओ कि अगर तुमने ऐसा नही किया न, तो तुम्हारा माल बिकने नही देंगे दुकानों में, आग लगा देंगे उनमे, और फिर से लाइन लगा कर खड़े हो जायेगे हिंदुस्तान यूनीलीवर के दरवाज़े में, हम बताये दे रहें है। और इसे धमकी मत समझना ये हमारा इतिहास है! क्योकि हम हिंदुस्तानी हैं और हमें आदत हैं मुगलो और अग्रेजो की गुलामी की। अब हम अपने मन की बात तुमसे क्या बताएं, लेकिन सच ये है कि हमारे मन में सांप लोटने लगता है अपने सगे भाई की भी तरक्की देखकर फिर तुम कौन हो बे?

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Author: admin

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