भाजपा की नाकामी और कामयाबी का लेखाजोखा!

इसमे रत्ती भर शक नही है कि भारत की #अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर में है। छोटे और मझोले उद्योग भारी मात्रा में प्रभावित हुए है, रोजगार की स्थिति भी कमजोर है वावजूद इसके मेरी संवेदना भाजपा सरकार के प्रति अडिग है और उसके अपने महत्वपूर्ण कारण है। #भाजपा भारत की इकलौती पार्टी है जो तमाम राजनीतिक खेलो के वावजूद वर्षो से उपेक्षित रहे भारत के बहुसंख्यकों को #बहुसंख्यक बनाये रखने और भविष्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न सिर्फ राजनीतिक जुमलों में बल्कि वास्तव में अपनी कटिबद्धता साबित करती रही है। #धर्म, #आस्था, #संस्कृति और सुरक्षा पर भाजपा के विरोधी भी उसकी आलोचना नही कर सकते। माघ मेले जैसे भारत मे होने वाले तमाम भव्य अयोजनो और राम मंदिर जैसे अति #संवेदनशील मुद्दों का अविवादित समाधान, धर्म, आस्था और भारतीय संस्कृति के प्रति उसकी कटिबद्धता का जहाँ एक ओर प्रमाण है, तो दूसरी ओर, ट्रिपल तलाक, #अनुच्छेद 370 और #35A को दुनिया के भारी दबाव के उपरांत हटाना, उम्रभर पड़ोसी से परेशान भारत को अपनी आक्रामक नीतियों के द्वारा उनकी परेशानी का कारण बना देना #भाजपा के साहस और सुरक्षा के प्रति उसके समर्पण का परिचायक है। पश्चिम देशो के आर्थिक नीतियों को समझने वाले विद्वान जानते है कि पश्चिमी देशों की सरकारों ने अपनी योजनाएं कभी भी 10 या 20 वर्षो से नीचे की नही बनाई क्योकि बड़े परिवर्तन बड़े बदलाव के बाद ही लाये जा सकते है और भारत की सबसे लंबी योजनाएं 5 साल से ऊपर की नही रही। भारत की #पंचवर्षीय योजनाएं इसका उत्तम उदाहरण है। भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार और गति देने के लिए भाजपा ने जिन सुधारो को लागू किया है उसका प्रभाव तात्कालिक रूप से चल रही अर्थव्यवस्था पर भारी चोट किया है जो उतना ही स्वाभाविक है जैसे आपरेशन के बाद जख्मो का बन जाना, परंतु साथ ही उसे भविष्य की पटरी पर स्थापित भी कर दिया है। यद्यपि मैं अर्थशास्त्री नही हूँ मगर जितना समझता हूँ उसके अनुसार उम्मीद कर सकता हूँ कि आने वाले समय मे इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, शर्त इतनी है कि अगर विरोधी इन जख्मो को कुरेदने की जगह सूखने दे।भाजपा जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आलोचना झेलती है, वह है #रोजगार। देश मे हर वर्ष लगभग 2 करोड़ बच्चों का जन्म होता है जबकि संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर नए रोजगार कुछ लाख की पैदा किये जा सकते है, जिसका परिणाम ये होता है कि लगातार #बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और ये स्थिति पिछले कुछ सालों की नही है। ये अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है जो समय के साथ पुराने रिकॉर्ड तोड़ती रहेगी। भारत की सारी विरोधी पार्टी इसके कारण को भलीभांति समझती भी है मग़र उनका दोगलापन उन्हें सच नही बताने देता। भारत के अखबार भी नित रोज नए नए रिकॉर्ड छाप कर अपनी मूल जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।रोजगार पर विलाप करने वाले लोगों में शत प्रतिशत वह लोग है जो #जनसंख्या_नियंत्रण पर कानून बनने के या तो खिलाफ है या तो उस पर चुप है। भाजपा इतनी आलोचनाओं के वावजूद अपने योजनाओ पर डट कर खड़ी है। वह जानती है कि राजनीतिक लाभ के लिए एक स्वस्थ #अर्थव्यवस्था को रोजगार के नीचे दबाकर नही रखा जा सकता। जिस आफिस में 5 कर्मचारियों की जरूरत है, वहाँ 10 कर्मचारियों को भरना अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने जैसा है। ऐसी स्थिति में भारत दुनिया की #बाजार में बहुत पीछे छूट जाएगा। इसलिए भाजपा ने इसके मूल समस्या को हटाने पर जोर देना उचित समझा, जिसका परिणाम है NRC तथा #जनसँख्या_नियंत्रण_कानून।भारत के #गृहमंत्री ने अपनी कटिबद्धता को दिखाते हुए कह चुके है कि भारतीय #संसाधन भारत की जनसंख्या के अनुसार पहले ही बहुत सीमित है अतः भारतीय संसाधनों का दोहन करने वाले एक एक घुसपैठिये को 2024 से पहले देश से बाहर निकाल दिया जाएगा और साथ ही बेरोजगारी से निपटने के लिए तात्कालिक रूप से निजीकरण का रास्ता अपनाया जाएगा।आने वाले समय मे #NRC प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद भाजपा सरकार की निगाह, जनसंख्या कानून को बनाने और उसे कड़ाई से लागू करने के लिये रोडमैप बनाने में केंद्रित होने वाली है। और वास्तव में नए भारत को स्थापित करने का यह ऐसा कदम होगा जिसके बाद जनसंख्या का #भौगोलिक अनुपात स्थर हो जाएगा और भारत के लोग अपनी जनसंख्या बढ़ा कर देश पर कब्जा करने की बजाय अपनी तरक्की पर केंद्रीकृत हो जायेगे। जनसंख्या की जगह प्रतिस्पर्धा इस बात पर होगी कि अर्थिक और राजनीतिक रूप से ससक्त समाज कौन सा है?भारत के भविष्य की चिंता करने वाला हर व्यक्ति किसी भी आदर्श सरकार से यही उम्मीद करता है और आज की तमाम चुनैतियो के वावजूद मुझे भारत के भविष्य और अपनी आने वाली पीढ़ियों की चिंता है।

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Author: admin

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