भारत में मुगलो हुकूमत के में भी हिन्दू कैसे रहा बहुसंख्यक?

एक सवाल था जो कल से सोशल मीडिया पर घूम रहा है कि भारत को इस्लामी राष्ट्र बन जाने का डर दिखाने वाले बताये कि ‘अगर ऐसा है तो 550 साल तक देश में मुगलो की हुकूमत रही फिर अब भी इस देश में हिन्दू क्यों है?’ हालाकि मुद्दा जरा संवेदनशील है और सच कहू तो मुझे भी ऐसे मुद्दों पर लिखने से डर लगता है, बिना वजह मुस्लिम विरोधी का तमगा मुझ पर चिपका दिया जायेगा मगर जिक्र हुआ है तो जरा समझे तो सही कि उनके सवालो में दम कितना है? 

पाकिस्तान भारत और बांग्लादेश के मुस्लिम की आबादी को जोड़ा जाये तो लगभग 55 करोड़ के आसपास है और हिंदुओ की आबादी लगभग 95 करोड़। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 1192 में आये कुल मुस्लिम आक्रांता लगभग 15-20 हजार थे मगर खुद को उनका वंशस बताने वालो की संख्या अखंड भारत में आज बढ़ कर लगभग 55 करोड़ हो गयी है। तो कौन है ये लोग ? कहाँ से आये हैं ?  इस पर बात करू उससे पहले मेरे कुछ सवाल है जिन्हे मैं उन मठाधीशो से पूछना चाहता हूँ जिन्हे अपनी जाति पर तो घमंड है मगर दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति उन्हें सांप्रदायिक क्यों लगती है? अपने सम्मान और सस्कृति को सहेज कर रखना और उसकी सुरक्षा और अमरता के प्रति कटिबद्ध होने का मतलब क्या यह है कि आप दूसरो के लिए खतरा है? सांप्रदायिक है? या समाज में जहर घोल रहे है? समाज के तथाकथित सेकुलर्स अपनी संस्कृति से अनभिज्ञ हिन्दुओ के दिमाग में एक गाना बजा बजा कर उन्हें इतना डरा दिया है कि सार्वजानिक स्थान पर उन्हें खुद को हिन्दू कहने पर भी हिचक महसूस होने लगी है। दुनिया का हर विकसित समाज धर्मनिरपेक्षता की वकालत करता है मगर साथ ही गर्व से कहता है कि मैं एक सच्चा मुसलमान हूँ, क्रिस्चन हूँ पारसी हूं, यहूदी हूं। मगर जैसे ही आपने कहा कि मैं हिँदू हूँ! देश की सारी सेक्युलर जमात आपको ऐसे देखेगी कि बस धरती का फटना बाक़ी रहता हैं वर्ना दिल तो यही कहता है – ‘इन नज़रो का सामना करने से अच्छा है कि अभी के अभी धरती फटे और मै उसमे समा जाऊ।’ 

1192 में पहली बार कोई मुस्लिम आक्रांता भारत में हुकूमत स्थापित करने के ख्वाब के साथ आया था जिसे हम मुहम्मद गोरी कहते है। अगर हम वर्ल्ड हिस्ट्री साइट के डाटा को माने  तो उस समय विश्व की आबादी लगभग 36 करोड़ थी जिसमे लगभग 30 % लोग इंडियन सबकॉन्टिनेट (अखंड भारत) में थे जिनकी कुल आबादी लगभग 10.8 करोड़ थी जो 99.99 % हिन्दू धर्म का पालन करती थी। हालाकि कुछ इतिहासकारो (K.S. Lal) का दावा है कि उस समय अखंड भारत की कुल आबादी लगभग 22 करोड़ थी। जबकि यही आबादी मुगलकाल का सूरज डूबते डूबते अगले 558 सालो यानि कि 1750 तक घट कर सिर्फ 15.5 करोड़ रह गयी। जिसका मुख्य कारण था मुगलो की दमनकारी नीतिया और हिन्दुओ का कत्लेआम। 

इतिहासकार K.S. Lal के दावे के अनुसार मुग़ल काल में लगभग 6-8 करोड़ हिन्दुओ का क़त्ल किया गया था। जो कुल आबादी का लगभग आधा है और जिसमे अधिकतर पुरुष थे। इस कत्लेआम में अपने सुहाग को खो चुकी अधिकतर महिलाये मुगलो की गुलाम बना ली जाती थी, जिन्हे मुस्लिम आबादी को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि इस बारे में इतिहासकारो ने अपने शब्दों में काफी रियायत बरती है मगर मुस्लिम आबादी बढ़ने की रफ़्तार के कई तर्कों के सामने इस तर्क पर अपनी अनचाही सहमति जतानी पड़ी।  

1750 -54 वो साल भी था जब अंग्रेजो की हुकुमत भारत में तेजी से पैर पसार रही थी और औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल बेहद कमजोर हो चुके थे। मुगलकाल में बादशाहो से मिलने वाला विशिष्ट सत्कार मुस्लिम समाज के अंदर विशिष्टता का भाव भर दिया था, जिसके वो आदी हो चुके थे मगर मुगलो के पतन और अंग्रेजी साम्राज्य के उदय के साथ ही उन्हें हिन्दुओ की बहुसंख्यक आबादी से चुनौतियां मिलनी शुरू हो गयी। और यही वो वजह थी कि हिन्दुओ की तुलना में आम मुसलमान अंग्रेजो का ज्यादा वफादार बन गया। ये दौर 1919 के खिलाफत आंदोलन तक जारी रहा। हालांकि इस दौर में अंग्रेजो ने खुलेतौर पर धर्मपरिवर्तन को प्रोत्साहित नहीं किया मगर आम मुस्लिम समाज की सामान्य जनसँख्या बृद्धि के लिए समय अनुकूल बना रहा। जबकि अग्रेजो से हो रहे स्वतंत्रता संग्राम और उनकी दमनकारी नीतियों के चलते हिन्दुओ ने बहुतायत मात्रा में अपनी जाने गवाई। 

अंग्रेजो की 197 साल की हुकूमत के बाद 1947 की बात करे तो उस समय अखंड भारत की कुल आबादी लगभग 42.4 करोड़ हो चुकी थी। जिसमे हिन्दुओ की आबादी का लगभग 29.48 करोड़ जबकि मुस्लिम आबादी 10.99 करोड़ थी जो भारत की कुल आबादी का लगभग 26 % है।

अब बात करते है अपने मूल मुद्दे की। 1192 ई० से पहले जिनकी आबादी जीरो थी या फिर अक्रान्ताओ को जोड़ ले तो 15000 से 20000 थी वो 750 सालो में बढ़कर 10.99 करोड़ हो गयी जबकि 1192 ई० में ही हिन्दुओ की आबादी 22 करोड़ थी जो 750 सालो में बढ़ कर सिर्फ 29.48 करोड़ हो पायी। अब अगर इस बढ़ोत्तरी को प्रतिशत में देखें तो 750 सालो में हिन्दुओ की आबादी सिर्फ 34 % बढ़ी जबकि मुसलमानो की आबादी 732566.67% बढ़ गयी. 
जिन मठाधीशो को आकड़े कम समझ आते है उनके लिए बस इतना ही कि जब हाँथ कम हो तो समुन्दर को खाली करने में वक्त लगता है मगर अब हाँथो की सँख्या मुगलो की तरह महज 15 या 20 हजार नहीं है। 

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Author: admin

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