मुजफ्फरनगर के दंगो के ‘हिन्दू’ आरोपियों पर हुए फर्जी मुकदमो का क्या है सच ?

नशीम पुत्र श्री इमामुद्दीन, मूलरूप से मुजफ्फर नगर जिले  का निवासी था जो अपने गांव का घर और जमीं बेंच कर स्थाई रूप से २००८ से गाज़ियाबाद के लोनी में अपना मकान बनवा कर रह रहा था मगर तभी २०१३ में हुए मुजफ्फर नगर के गंगे जैसी उसकी लॉटरी खोल दी।  

हिंसा शांत होने के बाद, २६ अक्टूबर 2013 को उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने घोषित किया था कि सरकार की तरफ से 5 लाख की वित्तीय मदद सिर्फ मुस्लिम दंगा पीड़ितों को ही की जाएगी फिर क्या था नसीम ने मुजफ्फर नगर जिले के अपने भाई के घर को अपना घर बता कर खुद का नाम दंगा पीड़ितों में शामिल करवा दिया और सबूत के तौर पर कुछ फर्जी मुक़दमे गांव के ही दलित (हिन्दू) परिवारों के लड़के के नाम पर FIR करवा कर राहत शिविर में बस गया, लालच की हद तब हो गयी जब अपनी पत्नी के बलात्कार का एक और मुकदमा एक हिन्दू लड़के के नाम पर करवा दिया। 

सच्चाई भयानक थी और इलाके के अधिकतर मुस्लिम परिवारों की गरीबी के हालात ऐसे थे कि 5 लाख रुपये वो १० साल में भी नहीं कमा सकते थे इसलिए सरकारी पैसो को पाने के लालच में ऐसे मुस्लिम परिवारों ने जिन पर दंगो का बिलकुल असर नहीं था, वह लोग भी अपने अपने घरो को छोड़ राहत शिविर में जा बसे और साथ ही सबूत के तौर पर हिन्दू लड़को पर भी फर्जी मुकदमा कराते गए। कुछ फर्जी मुक़दमे तो ऐसे लड़को के नाम पर भी दर्ज हो गए जो घटना के वक्त दिल्ली, मुंबई, लखनऊ अथवा  इलाहाबाद में या तो पढाई कर रहे थे या नौकरी। यकीं करना मुश्किल है मगर एक ऐसे लड़के के नाम पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था जो कई साल पहले मर चुका था। इस तरह हजारो नसीमो ने मिलकर सरकारी पैसो की लूट मचा दी और दूसरे साइड हिन्दुओ पर फर्जी मुकदमे लदते रहे। ऐसा नहीं था की इस लूट में सिर्फ मुस्लिम ही शामिल थे, इस पूरे साजिस में कई NGO ने भी पैसे दिलाने में मुस्लिमो की मदद के एवज में उनसे कमीशन के तौर पर अपनी झोलिया भरी।

७ नवंबर २०१७ को उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी तब जाकर कोर्ट की फटकार के बाद  २५ नवंबर २०१३ को सरकारी विज्ञप्ति में विस्थापित मुस्लिम परिवार की जगह विस्थापित परिवार किया गया मगर जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला, और सहायता सिर्फ मुस्लिम परिवारों को ही जारी रही। 

उत्तर प्रदेश सरकार की इस नीति और कुछ मुस्लिम परिवारों के पैसो का लालच ने शिविर में रह रहे लोगो को अपने गांव वापस लौटने की सम्भावना को तब और मुश्किल बना दिया जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके द्वारा फर्जी मुकदमो में फसाये गए अपने पडोसी हिन्दुओ के बीच अब शायद वो सचमुच सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। 
हालॉकि बाद में मामला ठंढा पड़ने में प्रशाशन की मदद से फर्जी मुक़दमे झेल रहे गांव के लोगो ने ही पहल की और शिविर में रह रहे मुस्लिम परिवारों को भरोषा दिलाया कि वो आकर अपने घरो में रह सकते है जिससे कुछ परिवार लौट कर अपने घरो में बस गए। और कुछ के मुक़दमे भी ख़त्म हो गए मगर वावजूद इसके अब भी भाजपा नेता संगीत सोम सहित काफी ऐसे आम लोग थे जिन पर अब तक फर्जी मुक़दमे चल रहे है। राज्य की भाजपा सरकार के १ साल पूरा होने के बाद, योगी सरकार ऐसे मुकदमो को वापस लेने का फैसला किया है जो उन पीड़ितों के लिए किसी दिवाली से कम नहीं,जो फर्जी मुकदमो में फास कर पिछले 5  साल से कोर्ट के चक्कर काट रहे थे। 

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Author: admin

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