मेरी कामयाबिया भी ज़रा ठहरने लगी हैं !

बड़ी लम्बी रात थी जो अब गुजरने लगी है !

मेरी कामयाबिया भी ज़रा ठहरने लगी हैं !

सूरज फिर चढने लगा है आसमाँ की ओर ,

मेरे नसीब मे जमी बर्फ अब पिघलने लगी है !

-आनन्द

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Author: admin

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