मैं ‘पवित्र प्रेम’ पर नही लिखता

मैं ‘पवित्र प्रेम’ पर नही लिखता क्योंकि मैं कभी ‘प्रेम’ से मिला नही। ‘इश्क’ का चेहरा देखा तो है मगर उसमे लिखने लायक कुछ है नही।’जिस्मो’ को पाने की ख्वाहिशें, सपनो को हासिल करने जैसी है। और इसी पागलपन और जुनून को जब कलमकार प्रेम कहते हैं तो मैं निःशब्द हो जाता हूँ। समाज और इसकी मनोवृत्ति, लिखने के लिए मेरा पसंदीदा विषय है। जिन्होंने कभी भी मुझे, मेरी उपन्यासों या कविताओं के जरिये पढ़ा होगा, बस वही है जो मुझे समझ सकतें हैं।बाक़ी मेरे हालातो, विवशताओं और सफलता-असफलता के बीच मुझे ढूढ़ते रहिये।

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Author: admin

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