सुनो अभी मेरा इंतकाम बाँकी है!

तुम! हाँ तुम्ही से कह रहा हूँ! कि अभी मेरा काम बाँकी है।

तेरा रोना, चीखना चिल्लाना, अभी वह अंजाम बाँकी है।

तुमने अच्छी कोशिश की थी जो मुझे बर्बाद करने के लिए,

उस पर मेरी प्रतिक्रियायों के अभी हजारो पैगाम बाँकी है।

गुनाहगार तू ही है ये जानकर भी कभी शर्मिंदा नही हुआ?

तेरे उन तमाम गुनाहों का, अभी सिला-ए-आम बाँकी है।

वैसे तो कई शिकार हुए है मेरे अपने तेरी जालसाजी का,

मग़र मेरी पीठ में खंजर चलाने का अभी अंजाम बाँकी है।

शराब की बोतल में डुबोया है, मेरे घर के कई मासूमों को,

होगा तेरा हाल भी वैसा ही,अंधेरी वह अभी शाम बाँकी है।

समझता होगा राजनीतिज्ञ खुद को, मग़र सुन कायर है तू,

भरोषा हारा है,मैं नही, मेरे दाँव के अभी परिणाम बाँकी है।

वैसे तो खुश रहता हूँ साथ में मुस्कुराते चेहरों को देख कर,

मग़र आँखों मे चुभे तुझे, ऐसे काम अभी तमाम बाँकी है।

अभी खड़ा हुआ हूँ, देख उखड़ने लगी ईंटें तेरी हवेली की,

अपने घरों के ऐ रहबरों! सुनो अभी मेरा इंतकाम बाँकी है! –

राजेश आनन्द

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Author: admin

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