About

राजेश आनंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के भारतपुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके पिता ‘सालिक राम सिंह’ एक मध्यवर्गीय किसान व माता कैरी देवी गृहिणी हैं। ये 4 भाइयों एवं 2 बहनों में सबसे छोटी संतान हैं। प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 8 तक) गांव के पास श्रीमती रानी देवी माध्यमिक विद्यालय भगत का पूरा से हासिल की उसके बाद हाईस्कूल तथा इण्टर की पढाई के.पी. इण्टर कॉलेज प्रयागराज तथा ग्रेजुएशन व पोस्टग्रेजुएशन कानपुर विश्वविद्यालय से पूरी की।

यद्यपि पढाई में अच्छे थे परन्तु लेखन व चित्रकारी इनके पसंदीदा विषयों में से एक था जिसके चलते परिवार की इच्छाओ के विरुद्ध जाकर मेडिकल की पढाई बीच में ही छोड़कर नोएडा चले गए और वहाँ International Institute of Fashion Technology से 2 वर्षीय फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा हासिल किया मगर आर्थिक संकटों के बीच कभी किसी भी फैशन शो का हिस्सा नहीं बन पाए। अन्तः उनके पास सम्बंधित इंडस्ट्रीज में एक फैशन डिज़ाइनर के तौर पर काम करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा। 4 साल नौकरी के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपनी कम्पनी स्थापित कर ली।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

भाइयों में सबसे बड़े भाई ‘लक्ष्मी प्रसाद सिंह’ जो उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहें हैं वहीं उनसे छोटे भाई राकेश सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अपर निजी सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहें हैं जबकि तीसरे भाई उमेश सिंह गांव में ही पत्रिक खेती को संभाल रहें हैं।

लेखन पृष्ठभूमि

राजेश आनंद का जीवन परिचय शब्दों के धागे से नहीं गढ़ा जा सकता। संवेदनाये बचपन से ही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रही हैं। छोटी छोटी बातों के अभिप्राय को समझना, विश्लेषण करना उन्हें शब्दों और चित्रों के जरिये स्वर देने की चेष्ठा ने उन्हें बाल्य्काल में ही एक परिपक्व लेखक और चित्रकार बना दिया था। इन्होने पहली उपन्यास तब लिखी जब ये 7वी कक्षा में पढाई कर रहे थे जो संभवतः प्रकाशन के लायक नहीं थी और कभी प्रकाशित नहीं हो पायी जबकि दूसरी उपन्यास ‘गुनहगार’ जो नवीं व दशवी कक्षा की पढ़ाई के दौरान लिखी गयी थी वह 2002 में अंतिम रूप से प्रकाशित हुई जिसका विमोचन प्रयागराज में एक समारोह के दौरान डॉ सोने लाल पटेल के द्वारा की गयी थी।

Launched by Late Dr. Sone Lal Patel
Founder: Apana Dal

लेखन के प्रति आकर्षण उनकी प्रतिभा का नहीं अपितु स्वाभाव का हिस्सा था। अमूनन जिन घटनाओ को दिनचर्या का हिस्सा समझ व्यक्ति भुला देता है उन्ही घटनाओं में वह अपनी कहानियों के क़िरदार ढूढते हैं। अब तक लिखी उपन्यासों जैसे ‘गुनहगार’ में उन्होंने जहाँ एक ओर एक लड़की के पिता की मजबूरियाँ और इंसान की हैवानियत का जीवंत चित्रण किया है तो ‘रागिनी -द स्कूल गर्ल’ में उन्होंने 12-13 साल की लड़कियों के किरदारों को 21वी शदी के समाज से ऐसा रिश्ता कायम कर दिया है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं या अपने आस पास हो रही घटनाओं को जीवंत देख रहें हैं। स्कूल की लड़कियों में लड़कों को लेकर उनके मनोभाव, आकर्षण, और असहजता के खूबसूरत चित्रण ने कहानी के जरिये भावनाओ पर लेखक की पकड़ को प्रदर्शित करता हैं। यही उपन्यास अंग्रेजी भाषा में The School Girl के नाम से उपलब्ध है।

अपनी एक उपन्यास ‘मेरी अर्द्धांगिनी, उसकी प्रेमिका’ में जहाँ उन्होंने प्रेम और शादी के वीभत्स रूप से पाठको को अवगत कराया तो वही अपनी दूसरी उपन्यास ‘लाल ग्रह’ से उन्होंने कल्पनाओ की उड़ान को मंगल ग्रह तक लेकर चले गए। उन्होंने पृथ्वी के विखंडन से लेकर विज्ञान की दुनिया में अद्वितीय तरक्की के वावजूद प्रकति के सामने इंसान की लाचारी और दूसरे ग्रह में खुद को बसा कर जिन्दा रखने की जद्दोज़ेहद का बहुत ही खूबसूरत ख़ाका गढ़ा है। लेखक अपनी कल्पनाओ की उड़ान और कलम की धार को यहीं नहीं रोका। उन्होंने ‘हिन्दू -द दंगा’ उपन्यास जरिये उन्होंने धर्म में विघटित समाज पर कुठाराघात किया है। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि एक ब्राह्मण स्त्री मुस्लिम पुरुष से शादी करने के बाद कैसे एक कलंकित वस्तु में तब्दील हो जाती है जिसे न हिन्दू रखना चाहता है न मुसलमान।

दृष्टिकोण

राजेश आनंद ने जीवन को पारंपरिक तरीके से गुजारने के पक्षधर नहीं रहें। उनके अनुसार ‘नौकरी सेंट्रिक पढ़ाई’ और जीवन को ‘पैसे कमाने और सुख सुविधाओं’ की परिपूर्णता तक समेट देना, वास्तव में जीवन नहीं है। उन्होंने अपने जीवन के आरम्भिक काल से ही रचनात्मकता और अनेक क्षेत्रों के अनुभवों को हासिल करने को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया जिसके परिणामस्वरुप जहाँ एक ओर उन्हें अपने परिवार व सम्बन्धियों की आलोचना का शिकार होना पड़ा वही दूसरी ओर अनेक संघर्षों का सामना भी करना पड़ा जो सफलताओं और असफलताओं के बीच अनवरत अब भी जारी है।