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‘रागिनी – द स्कूल गर्ल’ 12 -13 की दो ऐसी लड़कियों की कहानी है जो अपनी छोटी सी उम्र में ही प्रेम, सेक्स और जिंदगी के सारे अनुभव को समेट लेना चाहती है। 13 वर्ष की ‘रागनी’ जिसे होश सँभालने से लेकर अब तक अक्सर अपने ही पिता की हवस का शिकार होना पड़ा और जिसके कारण पुरुषो को लेकर उसके अंदर झिझक और शर्म जैसे स्वाभाव कभी जन्म ही नहीं ले पाए। सेक्स जैसे सम्बन्ध उसके लिए वैसे ही थे जैसे आम लड़कियां भूख लगने पर कहीं भी खाना खा लेती हैं। हालांकि देखने में वह बहुत खूबसूरत नहीं थी मगर उसके बेपरवाह स्वाभाव ने लड़को के बीच उसे विशेष बना दिया जो दूसरी हमउम्र लड़कियों की जलन कारण बन गया। उसके साथ पढ़ने वाली लड़कियाँ उसकी तरह बनना चाहती थी, वह चाहती थीं कि रागिनी की तरह ही लड़को के बीच उन्हें भी भाव मिलना चाहिए और इसी ख्वाहिश ने उसकी खास दोस्त नीलम की जिंदगी को एक ऐसे रास्ते की तरफ मोड़ दिया जहाँ पर उसे रागिनी कभी नहीं जाने देना चाहती थी। भावनाओ, द्वन्द और एक दूसरे से आगे किसी भी हद तक निकल जाने की प्रतिस्पर्धा और उसमे चुने गए रास्ते ही इस कहानी के ऐसे धागे बन गए जिससे पाठको का निकलना मुश्किल हो जाता है । इन दोनों लड़कियों के किरदारों ने 21वी शदी के समाज से ऐसा रिश्ता कायम कर लिया है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं या अपने आस पास हो रही घटनाओं को जीवंत देख रहें हैं।

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इसी पुस्तक से…

‘‘मुझे नही पता संजय कि ऊॅची एड़ी के जूतो का अविस्कार किसने किया है मगर यकीन मानो उन जूतो को पहनने वाली दुनिया की सारी महिलाये उसका कर्ज कभी नही उतार पायेगी।’’

‘‘नीतू।’’ मैं हैरानी भरे अंदाज मे उसे पुकारा। मुझे उसकी बात समझ नही आयी तो मैंने पूँछा -‘‘इसका मतलब?’’

‘‘कुछ बातो का मतलब नही होता है संजय।’’ वह अचानक हॅस पड़ी -‘‘इत्र जानते हो न?’’

‘‘हाँ।’’ कहने को तो मैंने कह दिया मगर समझ नही पा रहा था कि वह क्या कहने की कोशिश कर रही थी। मैंने संदेहात्मक भरे स्वर मे पूँछा -‘‘तुम परफ्यूम की बात कर रही हो?’’

‘‘एक दार्शनिक थे – ‘कोको चैनेल’।’’ उसने मेरी बात पर बिना ध्यान दिए हुए अपनी बात जारी रखते हुए बोली -‘‘कोको चैनेल ने कहा था कि वे औरते जो इत्र नही लगाती उनका कोई भविष्य नही है। और मैं शायद उन्ही मे से हूँ।’’ उसने अपने आखिरी शब्दो को धीरे से कहा।

‘‘लेकिन नीतू इससे मेरी बातो का क्या लेना देना?’’ मैंने पूँछा।

‘‘नही संजय… दरअसल ये जिन्दगी का सार है और इन्ही चंद शब्दो मे जिन्दगी की पूरी समस्याए और सारे सुख निहित होते हैं। जानते हो कैसे?’’ वह थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोली।

‘‘कैसे?’’ मैंने पूँछा।

‘‘संजय, ऊॅची एड़ी के जूते पहने हुए और इत्र की खुशबू से महकती गोरी औरतें कभी अकेली नही होती। श्वेत पुरुष उन्हे प्यार करते है और अश्वेत उन्हे पाने की इच्छा रखते है। और शाश्वत नियम यह है कि जिस भी चीज की मांग बढ जाती है, उसकी कीमत भी बढ़ जाती है। और जिन्हे फिर देर तक बाजार से दूर नही रखा जा सकता। क्योंकि आज के समाज मे ऐसे बहुत लोग हैं जो मंहगी चीजो के शौकीन होते है।’’

उसकी बात एक बार फिर मेरे सर के ऊपर से निकल गयी। मैंने चंद क्षणों तक मोबाइल को कान से हटाकर उसे एकटक देखता रहा। समझने की कोशिश कर रहा था कि फोन पर नीतू है या राज। दोनो की बातें मुझे समझ नही आया करती। पता नही कौन सी किताबें पढ़ते हैं दोनो?

‘‘संजय।’’ मुझे खामोश देखकर नीतू ने पुकारा।

‘‘हूँ।’’ मैंने धीरे से कहा।

‘‘तुम जानते हो कि…।’’

“अब मैं कैसे निकलू इस हालात से? मैंने उसकी बात बीच में ही काट दी। उसे और इधर उधर की बातें करने का बिना मौका दिए हुए मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा -‘‘मैं अब हार चुका हूँ नीतू। मैं सचमुच समझ नहीं पा रहा हूँ कि अपने दाम्पत्य जीवन को बिखरने से कैसे रोकूँ?’’

“संजय।’’ उसने कुछ कहना चाहा।

“रुको नीतू।’’ मैंने एक बार फिर उसकी बात बीच मे ही काट दी –“मैं इंजीनियरिंग का छात्र रहा हूँ। टिपिकल बातें मुझे जरा कम समझ आती है। क्या तुम मेरी समस्याओ का हल आसान भाषा मे मुझे समझा सकती हो?’’

‘‘आसान भाषा?’’ वह हॅस पड़ी -‘‘संजय मैं कोई टीचर नही हूँ तुम्हारी… और सच कहूँ तो… मेरे पास तुम्हारी समस्याओ का कोई हल है भी नही। मगर मुझे इतना पता है कि आसान भाषा, समझ मे तो जल्दी आ जाती है मगर उसका प्रभाव इतना नही होता कि लोग उसका अनुसरण करे। यही मानव का स्वभाव है।’’

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The School Girl – when she became her father’s girlfriend, is the story of two girls of 12-13 years who want to embrace all the experiences of love, sex, and life at a very young age. The 13-year-old ‘Ragini’ who had to bear the brunt of her own father’s lust since taking care of her senses and due to that hesitation about men, could never take birth on her mind. Relationships like sex were the same for her as ordinary girls eating food anywhere when they are hungry. Although she was not very beautiful to look at, her careless nature made her very special among the boys which became a big reason to jealous of other girls. The girls studying with her wanted to be like her, she wanted to get a sense of belonging among the boys, like Ragini, and this desire turned her special friend Neelam’s life towards a path where Ragini would do not want to let her go. Emotions, conflicts, and competition to overtake each other to any extent and the paths chosen in it became the threads of this story that make it difficult for the readers to overcome. The characters of these two girls have established such a relationship with the society of the 21st century that it becomes difficult to understand whether you are reading a story or watching the events happening around you lively.

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