Shayri

मेरी मुहब्बत का सफ़र भी अज़ीब था. 
कभी ये करीब था कभी वो क़रीब था. 
डूबा रहा जिश्म मे मगर रुह न मिलीं,
ये थी खुशनसीबी या मै बदनशीब था.

**************************************************

और पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें