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मेरी हस्ती मिटा दी तुमने,अब बचा लो अपनी हस्ती को।

कौन खड़ा था किसके ऊपर,कहाँ पता दीवारों को। नींव गड़ी है मिट्टी में, यह संशय था मीनारों को। मैं ही था वह नींव तुम्हारी, जिससे…

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